प्रो.विनय के विरुद्ध जाँच कमेटी गठित, उच्च न्यायालय के सेवानिर्वित्त न्यायाधीश के नेतृत्व में कमिटी करेगी जाँच

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लखनऊ 03 फरवरी 2023: मंगलवार को एकेटीयू के कुलपति प्रो.प्रदीप कुमार मिश्रा के विरुद्ध एक नई जाँच कमेटी गठित की है। UGC एवं पीएमओ से की गई शिकायत के अनुसार उच्च न्यायालय के सेवानिर्वीत न्यायाधीश के नेतृत्व में 4 सदस्यों की कमेटी जांच करेगी।

विगत दिनों राजभवन की तरफ से प्रो. विनय मिश्रा के विरुद्ध जाँच के लिए गठित की गयी कमिटी से जोड़कर इस प्रतिक्रिया को समझा जा रहा है।

इससे पूर्व वर्तमान कुलपति ने प्रो.विनय पाठक के सहयोगी पूर्व परीक्षा नियंत्रक अनुराग त्रिपाठी एवं आईइटी के निदेशक प्रो.विनीत बंसल को हटा दिया था। जिसके पश्चात कुलाधिपति ने पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में इस पुरे प्रकरण की जाँच हेतु कमेटी गठित की थी ।

विश्वविधालय  की तरफ से जाँच  कमेटी गठित

विश्वविधालय प्रशासन ने सेवानिर्वित्त न्यायाधीश प्रमोद कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में  21 नवंबर को विश्वविधालय आयोग की तरफ से उत्तरप्रदेश राज्य सरकार को प्रेषित एक शिकायती पत्र की जाँच हेतु 4 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। जिसमे सेवानिर्वित्त न्यायाधीश प्रमोद कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में, आरइसी सोनभद्र के निदेशक जीएस तोमर, सेवानिर्वित प्रधान न्यायाधीश संजय एवं सहायक कुलसचिव रणजीत सिंह को प्रस्तुता अधिकारी के रूप में तैनात किया गया है ।

कुलपति को सौपी जाएगी जाँच 

एकेटीयू के कुलपति प्रो. मिश्रा की तरफ से तैयार की गयी कमेटी प्रो.पाठक पर लगे 14 गंभीर आरोपों की जाँच कर रिपोर्ट कुलपति को सौपेगी। कमेटी विश्वविधालयों में हुए सभी भर्तियों की जांच, ई-कंसोर्सियम की जांच पीएनबी हाउसिंग में 700 करोड़ रुपए एवं 1000 करोड़ रुपए का गलत निवेश, परीक्षा के गोपनीय कार्यों में 100 करोड़ का गलत निवेश, डीडीक्यूआईपी में 300 करोड़ का फर्जी भुगतान, गोल्ड बॉन्ड में निवेश, प्लेगेरिज्म फर्जी पीएचडी, फर्जी पेपर, फर्जी विनियमितीकरण, आगरा एवं एकेटीयू की कार्यपरिषद में नामित प्रक्रिया की जांच, डॉक्टर विनीत कंसल एवं डॉ. अनुराग त्रिपाठी की प्रोफेसर पद पर फर्जी नियुक्ति, फर्जी बायोडाटा तैयार करना एवं निर्माण कार्यों का जाली तरीके से भुगतान करना जैसे गंभीर अनियमितता की जांच कर कुलपति को रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इसमें विश्वविधालय अनुदान आयोग, प्रधानमंत्री कार्यालय से मिले सभी सूचनाओं के साथ ही कार्य परिषद व वित्त समिति के किए गए सभी निर्णयों की जांच शामिल है।

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